hindi poetry / Poetry / Relationship & Stories

जिंदगी कुछ इस तरह से…

जिंदगी कुछ इस तरह से गुलज़ार होती,

अगर उस शाम वो हमारे साथ होते ,

न थिरक्ते यू  हाथ किसी और के हाथ में,

न  गुज़रती जिंदगी  किसी और की छाव में ,

उस शाम दिखाते अगर वो ये जज़्बा यू ,

लगते न फेरे हमारे किसी और के साथ में,

जिंदगी कुछ इस तरह से गुलज़ार होती,

अगर उस शाम वो ….

 photo credit :viaphotopin

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11 thoughts on “जिंदगी कुछ इस तरह से…

  1. सब मुझे चोर और निकम्मा कह रहे हैं ! क्या मैं चोर और निकम्मा लगता हूँ ?

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